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रामचंद्र इतिहासिक हैं अथवा नही हैं?

रामचंद्र इतिहासिक हैं अथवा नही हैं? मित्र यह विषय इतने महत्व का नही है कि राम पैदा हुए, कि नही हुए है परन्तु उस पुस्तक के पात्र का चित्रांकन जीवंत है उसे नाकारा नहीं जा सकता अन्यथा दलित समाज द्वारा ब्राह्मणों पर लगाये गए समस्त आरोप निराधार हो जायेंगे! अगर आज आरएसएस रामचंद्र को काल्पनिक कहे तो भी दलित राजनीति को रामचंद्र को इतिहासिक रूप से जीवित रखना पड़ेगा यह दलित राजनीति का आवश्यक तत्व है! जिस प्रकार राममंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद हिन्दू राजनीति का आवश्यक तत्व था उसी प्रकार दलित राजनीति को सत्ता के शिखर तक पहुँचने के लिए रामचंद्र को इतिहासिक स्वीकार करना और दलित समाज को स्वीकार कराना पड़ेगा, तभी जनमत का ध्रुवी कारण होगा! काल्पनिक तो ब्रह्मा विष्णु और महेश भी हैं किन्तु वे सब अवतार के रूप में स्थापित कर दिये गए हैं उसी प्रकार रामचंद्र को भी इतिहासिक और दलित समाज के लिए अत्याचारी राजा के रूप में स्थापित करना पड़ेगा तथा बहुसंख्यक समाज में में यह स्थापित करना पड़ेगा कि रामचंद्र के अनुयायी आज तक दलित विरोधी और हिंसक हैं जिस प्रकार भाजपा रामचंद की सीढ़ी पकड़ कर सत्ता के शीर्ष तक पहुंची है दलित राजनी...

आंबेडकर ही रामचंद्र हैं

आंबेडकर ही रामचंद्र हैं ब्राह्मणवादियों को खुश कर रहा हूँ कि बाबा साहब के रूप में विष्णु ने ११वां अवतार लेकर शूद्रो के कल्याण का विधान देकर अपनी भूल में सुधार किया है! जैसाकि त्रेता में बाली को छिपकर मारने की जो भूल रामचंद्र ने की थी उसका सुधार द्वापर में कृष्ण ने बहेलिये का तीर खा कर की थी ! उसी प्रकार सम्बूक ऋषि के वध की जो भूल रामचंद्र ने त्रेता में की थी उसी का सुधार कलयुग बाबा साहब के रूप में का जन्म लेकर शूद्र शिक्षा का विधान देकर भूल-सुधार की है इसलिए बाबा साहब राम और कृष्ण के सामान ही पूजनीय हैं! साकेत में बाबा साहब की मूर्ति रामलला के स्थान पर लगनी चाहिए !

आर्य समाज और मनुवाद

आर्य समाज और मनुवाद  जिस प्रकार दबंग कहा जाता है तो उसमे कोई एक व्यक्ति का बोध नही होता है बल्कि एक जैसी विचारधारा के लोग होते हैं जो दूसरे समाज को अकारण ही उत्पीडित और परेशान करते रहते हैं यह गैर-शासकीय आतंकवादी होते हैं! इसी प्रकार शासकीय आतंकवादी भी हुए हैं जो शूद्र वर्ग के लोगो को सताने परेशान करने उनका धन छीनने तथा शिक्षा से वंचित करने के लिए महामंत्री की सलाह पर जो कार्य किया करते थे उसे मनुवाद कहते हैं! विभिन्न राज्यों में उनके मंत्रियो द्वारा लिखी गयी स्मृतियों में शूद्र के शोषण की विधियाँ संकलित है जोकि मनु महाराज के काल में बनी भ्रंगु-संहिता से मिलता-जुलता ही है! इसमें दर्जनों सहिंताए हैं जो शूद्र वर्ग(श्रमिक) को उत्पीड़ित करने और सताने के लिए समकालीन राजाओ द्वारा उनके मंत्रियो की सलाह पर लागू की जाती रही हैं सामान्यतः उनके मंत्री ब्राह्मण कुल से आये पुरोहित होते थे जोकि अत्यंत महत्वकांक्षी और लोभी होते थे! ब्राह्मण कुल से आने के कारण राजा इनको सम्मान देता था किन्तु यह मात्र पुरोहित ही होते थे इनको ब्रह्म-विद्या की कोई अनुभूति नही होती थी किन्तु यह ब्राह्मण के तुल्य सम्मा...

meshram & ambedkar

https://www.youtube.com/watch?v=bgryGbNZ2GQ

vikas Dubey

vikash dubey https://www.youtube.com/watch?v=l9ViEIip9q4